Vol : 5 Sept 2011
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इस खबर ने आम जनता को उवेलत कर दया और वह सड़क पर उतरकर सरकार के इस कदम का अहंसामक तरोध करने लगी। दल पुलस ने अना को मिजेट के सामने पेश कया। अना ने रहा कए जाने पर दल से बाहर रालेगाँव चले जाने या ३ दन तक अनशन करने क बात अवीकार कर द। उह ७ दन के यायक हरासत म तहाड़ जेल भेज दया गया। शाम तक देशयापी दशन क खबर ने सरकार को अपना कदम वापस खींचने पर मजबूर कर दया। दल पुलस ने अना को सशत रहा करने का आदेश जार कया। मगर अना अनशन जार रखने पर ढ़ थे। बना कसी शत के अनशन करने क अनुमत तक उहने रहा होने से इनकार कर दया। १७ अगत तक देश म अना के समथन म दशन होता रहा। दल म तहाड़ जेल के बाहर हजार लोग डेरा डाले रहे। १७ अगत क शाम तक दल पुलस रामलला मैदान म और ७ दन तक अनशन करने क इजाजत देने को तैयार हु ई। मगर अना ने ३० दन से कम अनशन करने क अनुमत लेने से मना कर दया. उहने जेल म ह अपना अनशन जार रखा। अना को रालला मैदान मै १५ दन क अनुमत मल,और अब १९ अगत से ी अना राम लला मेदान मै जन लोकपाल बल के लये आनशन जार रखा| अंतत: सरकार को उनके आगे घुने टेकने पड़े और 12 गन बाद अना जी का अशन समापत हुआ|
यितव और वचारधारा गांधी क वरासत उनक थाती है। कद-काठ म वह साधारण ह ह। सर पर गांधी टोपी और बदन पर खाद है। आंख पर मोटा चमा है, लेकन उनको दूर तक दखता है। इरादे फौलाद और अटल ह। महामा गांधी के बाद अना हज़ारे ने ह भूख हड़ताल और आमरण अनशन को सबसे यादा बार बतौर हथयार इतेमाल कया है। इसके जरए उहने ट शासन को पद छोड़ने एवं सरकार को जनहतकार कानून बनाने पर मजबूर कया है। अना हज़ारे को आधुनक युग का गाधी भी कहा जा सकता है अना हज़ारे हम सभी के लये आदश है । अना हज़ारे गांधीजी के ाम वराय को भारत के गाँव क समृ का मायम मानते ह। उनका मानना है क ' बलशाल भारत के लए गाँव को अपने पैर पर खड़ा करना होगा।' उनके अनुसार वकास का लाभ समान प से वतरत न हो पाने का कारण रहा गाँव को के म न रखना. यित नमाण से ाम नमाण और तब वाभावक ह देश नमाण के गांधीजी के म को उहने हककत म उतार कर दखाया, और एक गाँव से आरभ उनका यह अभयान आज 85 गाव तक सफलतापूवक जार है। यित नमाण के लए मूल म देते हु ए उहने युवाओं म उतम चर, शु आचार-वचार, नकलंक जीवन व याग क भावना वकसत करने व नभयता को आमसात कर आम आदमी क सेवा को आदश के प म वीकार करने का आवान कया है।
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