सकािळ ७ ते े ८ वाजेपये र्ंतर्ं . पेपरे वाचन..
सकाळी ८ ते े ८-३५ बर्ेकफे ास्ट
सकाळी ८-३५ ते े ९-४५ मौन वर्त आिण मेडे ीटॆशनॆ
सकाळी ९-४५ ते े १०-३० कॉल्स, डीस्कशन्स वगैरै ेे..
आह ेे की नाही मस्त पर्ोगर्ाम??
शेवटचे ी पाटी.. टॉयलेटच्ये ा दारावरची होती… िप्लझ फ्लश….
म्हणुनु ..
बरंं नुसत्यु ा पाट्या लावुनचु ह ेे लोकंं थाबलेले े े नाहीत. तर गाडी सुरुु
झाली की या डलेे ी पॅसॅ ेंजसें र् र् मह्दलाच एक पॅसॅ ेंजरें येउने अनाउन्स करुन
जातो.. िमतर्ॊ.. इस गाडी मे े आपका स्वागत ह. ैै नाशत्ता एंजं ॉय करेे
लेिकने , नाश्ता खत्म करनेके ेे बाद , पेपरे प्लेटसे और चाय केे कप्स इस
कोच केे बाहर एक डस्ट िबन रखा ह ैै उसमे े डालें. ें कंंपाटर्मर् ेंटें मे े कचरा,
खाने े की िचजे े फैैलानेसे े े कॉकर्ोच , और चंुहंु ेे होते े ह.. ैै असं ं सांगं ुनु गेले ा
तो माणुसु ..
सगळ्यांनं ी
बर्ेकफे ास्ट सुरुु केेला.
आिण जवळपास
सगळ्यांनं ीच कागद
बाहरेे नेउने फेेकलेे
डस्ट िबन मधे.. े बरंं
तोच माणुसु पुन्हु ा
एकदा आला, आिण
सगळ्या कोच मधेे
एक चक्कर मारली . सगळी कड ेे चेके केेलं.. ं आणी शेवटे ी सगळ्यांचं े े आभार मानले. े आिण अनाउन्स केेलं.. ं की सब
लोगोने े कचरा बाहर फेेककर अपने े िसिव्हलाइझ्ड होने े का सबुतु िदया ह. ैै केेवल एक जगह पर कचरा पडा हुवा िमला,
असं ं म्हणुनु त्याने े दोन चहाचे े िरकामे े कप्स उचलुनु दाखवले. े ते े कप्स ज्याचे े होते े तो माणुसु अगदी शरिमंदं ा झाला आिण
उठुुन आला, म्हणाला सॉरी, मै ै फेेकत हु.. ंं पण त्या माणसाने े त्याला म्हटलंं ं , ं की मै ै फेेक दगंंुु ा आपकेे िलये , े लेके ीन
अगली बार आओगे े तो याद रखना…
खरंंच .. ह्या टर्ेनने े े पर्वास केेल्यावर मातर् एका गोष्टीची खातर्ी पटली की आपण भारतामधेहे ी पिब्लक टर्ान्स्पोटर् र् व्हइकल्सेे
मेंटें ेंनें करु शकतो.. कुुठेेही पान िकंंवा मािणकचंदं खाउन थंुकणंु े, े पिब्लक प्लेसे मधे े िसगारेेट्स ओढणे े अशा गोष्टी अव्हॉइड
केेल्या तर मंुबईंु चं ं शाघंं ाई होण्यासाठी काहीच वेळे लागणार नाही.
पंचवटं ी एक्स्पर्ेसे चे े उदाहरण… म्हणेजे े “े वुईु कॅॅन– ऍंड वुईु िवल” चे े उत्कृृष्ट उदाहरण आह..ेे
आपण भारितय जर मनात आणलं ं तर कािहही करु शकतो .. नाही कां? ं फक्त वुइु िनड अ डर्ायिव्हगंं फोसर्…र्
महदर्ेंें कुुलकणीर्
http://kayvatelte.wordpress.com
दबईुु (१)…….
मस्कतला रहायला येण्ये ापूवू ीर् जसं ं ओमान हा दशेे जगाच्या पाठीवर नक्की कुुठेे आह ेे हा पर्श्न होता तसेचे त्यावेळे ी दबईुु
आिण U.A.E. याबद्दलही मनात गोंधळ होता……िकर्केेटच्या मॅचॅ ेसे मधे े शारजा कप असतो ते े शारजा, दबईुु या
दशेे ाजवळ आह ेे ह ेे असलं ं भौगोिलक अज्ञानसुद्धु ा होते.े
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